पल भर प्यार 

अनदेखी धागों की एक रील

 

धागा जो तुम्हारे कलाई से बंधा हुआ है, जिसका दूसरा सिरहा बंधा है एक लड़की के कलाई से। याद है , जिसे देखा था कल रात एक होटल में , पर बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएं। 

सोचो वैसेही , दो नजरे मिली थी एक स्टेशन पे , लड़का जो ट्रैन से अभी अभी उतरा था , और उसी वक़्त एक लड़की वही ट्रैन में चढ़ी थी।  इन दोनों को जोड़ता हुआ ऐसा ही एक अनदेखा धागा  था।  

अभी सोचिये ऐसे बहोत सारे अंधेके धागे।  आधे अधूरे कहानियों का एक पूरा जाल , कुछ चंद शब्दों की उलझन। जिन्हे अगर थोडासा मौका मिलता , तो उन्ही धागों की मोहब्बत भरी कहानियां बन सकती थी। 

ऐसेही हमारी इस महीने की दो टैक्सिस बताती है , एक लड़का और एक लड़की की ऐसे अधूरी प्यार की कहानी। दो अलग अलग टैक्सिस में सफर करते हुए , एक दूसरे से नज़ारे चुराते हुए , दोनों में प्यार हो जाता है।  कुछ चंद ही पल लग जाते है दोनों को , साथमे जिंदगी बीतने के सपने देखते हुए। अपना जीवन साथमे देखते हुए।  

"अलग टैक्सिस , एक जैसा ख्वाब " झो जल्द ही हॉर्न बजाते हुए गड्डियों के बिच कहीं खो जाता है , और दोनों  टैक्सिस अपने अपने रास्ते निकल पड़ती है।  

प्यार जो उतनी ही जल्दी खो गया , जितने जल्दी मिला था।  

लाल से एक हरी बत्ती तक फैली , ये कहानी लिखी है कनिका परब ( सह - संस्थापक ब्राउन पेपर बैग ) ने और मेहनत से हस्तलिखित की गई है ग्राफ़िक डिज़ाइनर सुशांत कदम ने, जिसने ये कहानी उस लड़के की नज़रअंदाज़ से , टैक्सी के अंदरि छत पर लिखी है।  

हम कामना करते है की आपको इन टैक्सिस में सवारी करने का मौका इस शहर में कभी ना  कभी जरूर मिले , पर अगर आप ना  कर पायें , तो  आप पूरी कहानी निचे पढ़ सकते है, और इसका इस्तेमाल कर सकते है अपनी संभावित कहानी बनाने में।  


 उसे नापसंद है काम से लौटते वक्त की कैब राइड ढीली, सुस्त, नीरस।
 सिग्नल पर बत्ती लाल है, उसका दिल थम जाता है। 

उसके साथ वाली टैक्सी में एक लड़की है, गाड़ी रुकते ही उसके मुँह से निकलता है ओह! 
 बालों की लटें उसके चेहरे पर नाचतीं,  

 उसको देखते ही उसे प्यार हो जाता है।  
  वो अपनी दायीं आँख झपकाती है  
एक तिनका पलक, रुई से भी हलकी, उसके गाल पे आकर संभलती है।      

कुछ मांग लो, वो मन ही मन कहता है 

दोनों सामने देखने का दिखावा करते हैं। अलग अलग टैक्सियों में बैठे दिन में एक ही ख़ाब देख रहे हैं के वो साथ हैं. दुनिया एक बेहतर जगह हो गयी है। कल एक ही कैब में सफर करेंगे। 

लाल बत्ती अब सुनहरी हो गयी  है, सुनहरी जल्द हरी हो जाएगी। 

ज़रूरी हो गयी है एक दुसरे को प्यार करने की ज़रुरत । नाम, नौकरी और पालतू जानवरों की बातें बाद में होंगी। 
गाड़ियों का शोर शुरू हो जाता है।  
उसकी टैक्सी तेज़ी से आगे निकलती है.....गाड़ियों और शहर के पागलपन में गुम हो जाती है।  

वह सामने,रियर व्यू मिरर से  अपने गाल पर पलक से टूट कर गिरे एक तिनके को देखती है। 

वह ज़ोर से एक मन्नत मांगती है, टैक्सी ड्राइवर मुस्कुरा पड़ता है।


 
 

This article is translated in Hindi from our 'Her Taxi' Article by Nakul Yadav. 
You can view the article here.

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